Zoho vs Microsoft

भारत का बड़ा टेक बदलाव: Zoho ने माइक्रोसॉफ्ट को चुनौती दी | ज़बरदस्त इंडियन SaaS

हाल ही में, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और धर्मेंद्र प्रधान ने एक ऐसी स्वदेशी कंपनी की चर्चा की है जिसने पूरे देश में ‘स्वदेशी मूवमेंट’ की नई आग लगा दी है। इस कंपनी का नाम है जोहो (Zoho), जिसे श्रीधर वेम्बू ने शुरू किया है।

Zoho vs Microsoft

2.स्वदेशी 'Zoho' को क्यों मिल रहा है सरकारी बढ़ावा?

रेल और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर जानकारी दी कि अब वह अपने सारे आधिकारिक प्रेजेंटेशन, डॉक्यूमेंट और स्प्रेडशीट जोहो पर बना रहे हैं, न कि माइक्रोसॉफ्ट पर। उन्होंने अपने ट्वीट में जोहो पर बनी स्लाइड्स का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया।

  • जोहो शो (Zoho Show): माइक्रोसॉफ्ट पावरपॉइंट का विकल्प (प्रेजेंटेशन के लिए)।

  • जोहो राइटर (Zoho Writer): माइक्रोसॉफ्ट वर्ड का विकल्प (डॉक्यूमेंट के लिए)।
  • जोहो शीट्स (Zoho Sheets): माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल का विकल्प (स्प्रेडशीट के लिए)।

  • जोहो मेल (Zoho Mail): जीमेल का विकल्प।

  • जोहो कैलेंडर (Zoho Calendar): गूगल कैलेंडर का विकल्प।

Zoho vs Microsoft

3.Zoho की सर्विस का इस्तेमाल कौन-सी कंपनियां करती हैं?

यह कंपनी CRM (कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट) सर्विस के लिए दुनिया भर में मशहूर है। बड़ी-बड़ी ग्लोबल कंपनियाँ जैसे Netflix, Cisco, Ford, Hyundai, City Bank, HDFC भी जोहो की सर्विस का इस्तेमाल करती हैं।

Netflix, Cisco, Ford, Hyundai, City Bank, HDFC

4.Zoho के बारे मे महत्वपूर्ण जानकारी

  • जोहो की ताकत: विज्ञापन नहीं, सिर्फ़ काम
  • जोहो कोई नई-नवेली कंपनी नहीं है।

  • शुरुआत: 1996 में ‘Zoho’ के नाम से सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट फ़र्म के तौर पर हुई।

  • रेवेन्यू: यह कंपनी हर साल $1 बिलियन डॉलर (लगभग ₹8700 करोड़) से ज़्यादा का रेवेन्यू करती है।

  • वैल्यूएशन: इसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब $12 बिलियन डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) है।

  • खासियत: यह एक बूटस्ट्रैप्ड (Bootstrapped) कंपनी है, जिसका मतलब है कि इसने बाहर से कोई फ़ॉरेन फ़ंडिंग (Foreign Funding) नहीं ली, सारा पैसा ख़ुद ही लगाया है।

5.Zoho को सरकार इतना बबढ़वा क्यों दे रही है ?

  • यह एक बड़ी बात है! सरकार खुद देश की एक कंपनी को इतना बड़ा प्रचार दे रही है। इससे देश में यह संदेश गया है कि हम भारतीय कंपनियों पर भरोसा कर सकते हैं और उन्हें आगे बढ़ा सकते हैं।

  • इससे पहले, धर्मेंद्र प्रधान जी ने भी मैसेजिंग के लिए जोहो के ‘ज़ोहोटाइज़’ (Zoho Cliq) जैसे सॉफ़्टवेयर को WhatsApp के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही।

  • यह सब उस माहौल को बढ़ावा देता है जहाँ भारतीय लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्यों हर बड़ी टेक कंपनी अमेरिकी या चीनी ही है, भारत में क्यों नहीं?

  • जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू का देशभक्ति संदेश

  • जोहो के फाउंडर, श्रीधर वेम्बू, चेन्नई, तमिलनाडु के रहने वाले हैं। वह IIT मद्रास से पढ़े हैं और अमेरिका से PhD करके H-1B वीज़ा पर अच्छी नौकरी छोड़कर भारत लौटे थे।

  • उन्होंने उन भारतीयों को एक ज़बरदस्त संदेश दिया जो H-1B वीज़ा की समस्याओं के चलते अमेरिका से भारत लौट रहे हैं। वेम्बू ने कहा
  • “डरो मत! भारत आओ। अपनी ज़िंदगी को दोबारा बनाने में 5 साल लग सकते हैं, पर यह तुम्हें और मज़बूत बनाएगा। हम दुनिया को पछाड़ सकते हैं।”

  • वेम्बू का मानना है कि भारत में रहकर ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर की चुनौती ली जा सकती है। यह बात जोहो के पक्ष में एक बड़ी भावनात्मक जीत साबित हुई।

6 .क्या है 'Zoho' और यह Microsoft को कैसे टक्कर दे रहा है ?

ज़्यादातर लोग प्रेजेंटेशन के लिए माइक्रोसॉफ्ट पावरपॉइंट, डॉक्यूमेंट के लिए वर्ड और कैलकुलेशन के लिए एक्सेल का इस्तेमाल करते हैं। जोहो ने इन सभी विदेशी टूल्स के देसी विकल्प तैयार कर दिए है दुनिया भर में 18,000 से ज़्यादा कर्मचारी इसके साथ काम करते हैं। श्रीधर वेम्बू ने अपनी कंपनी की स्थापना चेन्नई के बजाय अपने गृह ज़िले तेनकाशी (Tenkasi), तमिलनाडु में की, ताकि छोटे शहरों में भी रोज़गार के अवसर पैदा हों। यह सब दिखाता है कि जोहो अब भारत में माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनी को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है, और सरकार का समर्थन मिलने से इसकी रफ़्तार और बढ़ गई है।